नफ़रत वाला पति, मोहब्बत वाली ज़िंदगी - 1

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मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय मेरे।मैं लाल जोड़े में सजी थी, लेकिन दिल अंदर से टूटा हुआ था। आज मेरी शादी थी… लेकिन उस लड़के से नहीं, जिससे मैंने बचपन से प्यार किया था।“दुल्हन जी, ज़रा मुस्कुरा दीजिए…” फोटोग्राफर ने कहा।मैंने हल्की-सी मुस्कान देने की कोशिश की, मगर आँसू आँखों से ज़िद कर रहे थे।सामने मंडप में बैठा था — अर्जुन सिंह राठौड़।शहर का सबसे रौबदार, घमंडी और अमीर बिज़नेसमैन।जिसके नाम से लोग डरते थे… और आज वो मेरा पति बनने वाला था।लेकि अस्पताल से घर लौटते वक्त अर्जुन ने मेरा हाथ पूरे रास्ते नहीं छोड़ा। पहले जो आदमी मुझसे दूरी बनाकर रखता था… आज वही मेरी उंगलियाँ ऐसे थामे हुए था जैसे डर हो कि मैं फिर कहीं खो न जाऊँ। गाड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए मैंने धी