विक्रम के कमरे में केवल दीपक की रोशनी जल रही थी। मेज पर ताड़पत्र की वह किताब फैली हुई थी। बगल में उसकी नोटबुक, पेंसिल, और एक संस्कृत-कन्नड़ शब्दकोश (Dictionary)।विक्रम ने अपना चश्मा ठीक किया और प्राचीन लिपि को पढ़ने की कोशिश की। हर शब्द के कई अर्थ थे। हर वाक्य एक पहेली थी।"'वनस्पति विद्यावंत'..." उसने लिखते हुए बड़बड़ाया। "'वन' यानी जंगल, 'स्पति' यानी स्वामी... जंगल के स्वामी? नहीं, पौधों के स्वामी..."घड़ी में बारह बज रहे थे।उसने अगला पत्ता पलटा। संस्कृत के जटिल श्लोक।"प्राणायामेन वनस्पति संवादः... प्रकृति चेतना संयोगः...""प्राणायाम... सांस का व्यायाम? और वनस्पति संवाद... पौधों के साथ बातचीत?" उसने