भक्त प्रह्लाद - 5

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देवताओं के साथ युद्धअपने अंतःपुर दुर्ग और राज्य की विनाशलीला देखकर हिरण्यकशिपु क्रोध के मारे फुफकार उठा। रानी कयाधू के अंतःपुर में न होने की बात उसे सबसे अधिक चिंतित कर रही थी। वह इसी बारे में सोच-विचार कर ही रहा था कि उसे कोई अपनी ओर आता दिखाई दिया। जब वह निकट आ गया तो हिरण्यकशिपु के मुख से सहसा ही निकल पड़ा, “सेनापति तुम !”“हाँ महाराज!” सेनापति इल्वल ने अपना मस्तक झुकाते हुए कहा।“यह सब क्या है, इल्वल ?” सेनापति को देखते ही हिरण्यकशिपु के धैर्य का बाँध जैसे टूट गया, “असुरराज के दुर्ग की दुर्दशा और अंतःपुर