अदृश्य पीया - 19

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(हवन कुंड के सामने बैठे पंडित जी अचानक मौन हो जाते हैं।मंत्र रुक चुके हैं।।उनकी आँखें आग को नहीं…किसी पुराने दृश्य को देख रही हैं।)ये वही पंडित जी थे… जो इस घर में आज पहली बार नहीं आए थे।ये घर…ये नाम…ये रहस्य…सब उन्हें पहले से पता था।(पंडित जी की आँखों में बीता हुआ समय उतरता है।)पंडित जी (मन में) बोले - “कौशिक…विज्ञान का वो पागल लड़का…जो अदृश्य हो गया था।”(फ्लैशबैक शुरू होता है।)(शाम का समय। मंदिर में दीपक जल रहे हैं। घंटी की आवाज़।)(सुनीति मंदिर में बैठी है।उसके हाथ में एक पुरानी मोटी किताब है।)पंडित जी (तभी) बोले “बेटी…ये किताब साधारण नहीं