उस मूर्ति के गायब हो जाने के बाद राजू माँ के पास आकर लेट गया। उसकी आँखों में नींद नहीं थी। उसके सिर के नीचे चादर में बहुत सारा पैसा छिपा था। इतना पैसा तो उसने अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं देखा था। कभी दिन भर की मज़दूरी के बाद भी उसे ज़्यादा से ज़्यादा 200–300 रुपये ही जमा हो पाते थे। यह इतना पैसा था कि वह उसे गिन भी नहीं सकता था। माँ को क्या बताएगा कि यह कहाँ से आया? वह यही सब सोचते-सोचते सो गया। सुबह राजू माँ से पहले ही जाग गया। उसने चादर के