खुदकुशी कमल चोपड़ा रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ खड़ा होता। उसकी पत्नी कुलवीर कौर उसकी बाँह पकड़कर रोक लेती— “कुदरत के आगे इन्सान की क्या औकात?”कुछ दिनों से रह-रहकर चल रही तेज़ आंधी ओले और बरसात ने इलाके भर की फसलों को बरबाद कर दिया था। गाँव भर की औरतों की तरह कुलवीर कौर भी अपने पति सतवंत सिंह को लेकर बहुत चिंतित थी कि