बाजार से लौटते वक्त काया के कदम हवा में थे, लेकिन दिमाग सचेत था। उसे पता था कि अगर वे साथ घर घुसे, तो वंशिका की पारखी नज़रें और मनोरमा की शक की सुई उन्हें चीर देगी। उसने बीच रास्ते में ही भूपेंद्र को रुकने का इशारा किया।"साहब, आप पहले जाइये। मैं सब्ज़ियों के बहाने पीछे से आती हूँ। बवाल हो जाएगा वरना," काया ने अपनी साड़ी का पैकेट बड़ी चतुराई से प्लास्टिक के थैले में सब्ज़ियों के नीचे छिपाते हुए कहा।भूपेंद्र मुस्कुराया, उसकी आँखों में एक नई शरारत थी। "तुम बहुत तेज़ हो काया।"भूपेंद्र पहले घर पहुँचा। वह बेहद