डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 19

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अगले कुछ दिन घर के भीतर एक अजीब से भारीपन में बीते। ऊपर से सब कुछ शांत दिखता था—वही चाय, वही नाश्ता और वही औपचारिकताएं। लेकिन अंदर ही अंदर एक घुटन भरी कड़वाहट दीवारों में सिमटने लगी थी। वंशिका ने कई बार कोशिश की कि काया को उसकी औकात याद दिलाए, उसे सलीका सिखाए, लेकिन जैसे ही वह मुँह खोलती, मनोरमा देवी बीच में आ जातीं।"काया, ज़रा इधर आना तो, मेरा सिर दबा दे," या "काया, रसोई देख ले, बहू को तो वैसे भी फुर्सत नहीं," कहकर मनोरमा हर बार काया की ढाल बन जातीं।वंशिका को धीरे-धीरे यह समझ आने