डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 17

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अगली सुबह घर में सूरज की रोशनी के साथ एक नया तनाव भी उतरा। ऊपरी तौर पर सब सामान्य था, पर हवा में एक अजीब सी भारीपन थी। भूपेंद्र जैसे ही सोकर उठा, उसने काया को आवाज़ लगाने के लिए अभी मुँह खोला ही था कि काया उसकी चाय और ताज़ा प्रेस की हुई शर्ट लेकर कमरे में दाखिल हो गई। भूपेंद्र कुछ कहता, उससे पहले ही काया ने उसकी घड़ी और रुमाल मेज पर सजा दिए। बिना कहे, बिना पुकारे, काया भूपेंद्र की परछाईं बन चुकी थी।वंशिका जो अभी बिस्तर से उठी ही थी, काया का यह बेरोकटोक बेडरूम