कमरे में हल्की रोशनी थी। बाहर शाम ढल रही थी।नियति काउच पर बैठी थी। रोने की वजह से उसकी आँखें लाल थीं और चेहरा थका हुआ लग रहा था। सामने रिहान बैठा था। दोनों के बीच चुप्पी पसरी हुई थी।कुछ देर बाद रिहान ने पानी का ग्लास उसकी तरफ बढ़ाया।“लो पानी पी लो।”नियति ने कुछ पल ग्लास को देखा, फिर धीरे से उसे पकड़कर पानी पी लिया।बिना उसकी तरफ देखे उसने कहा,“आपको परेशान करने के लिए सॉरी।”रिहान ने शांत स्वर में कहा,“तुम सॉरी क्यों बोल रही हो? तुम्हें मुझसे माफी मांगने की जरूरत नहीं है। तुमने कुछ भी नहीं किया