प्रतिशोध की ज्वालाहिरण्याक्ष से राजपाट की बागडोर मिलने के पश्चात् हिरण्यकशिपु अत्यंत अहंकारी और अत्याचारी हो गया था। वह विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करने लगा था। जब उसे पता चलता कि अमुक स्थान पर लोग देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं तो वह उन्हें अपने सैनिकों को मृत्युदंड देने की आज्ञा दे देता। इस प्रकार उसकी अत्याचारी नीतियाँ जोर पकड़ने लगी थीं। उसने अनेक गाँवों को वीरान बना दिया था।हिरण्यकशिपु के राज्य में शैवमत के लोगों को हर प्रकार की स्वतंत्रता प्राप्त थी। जहाँ वैष्णवों का पतन हो चला था, वहीं शैवों का उत्थान अपनी चरम सीमा पर पहुँच रहा था। हिरण्यकशिपु