शाम ढल चुकी थी। पाँच सितारा होटल के बाहर रोशनी अभी भी तेज़ थी—काँच के दरवाज़ों से छनकर फुटपाथ तक आती हुई। वैलेट पार्किंग में गाड़ियाँ रुकतीं, खुलतीं, बंद होतीं। हँसी, परफ़्यूम, महँगे जूते—सब कुछ भीतर जा रहा था। फुटपाथ के किनारे नील बैठा था। घुटनों के बीच गिटार। सामने एक पुराना कटोरा। दाढ़ी काफ़ी बढ़ चुकी थी। बाल बिखरे हुए। चेहरे के निशान हल्के पड़ गए थे—पर थे। बाएँ गाल पर सूजन अब भी अजीब-सी आकृति बनाए हुए थी। आँखों में न शिकायत थी, न उम्मीद—बस एक थकान। वह गिटार बजा रहा था। धीरे। साफ़। कुछ लोग रुकते। कुछ