बीस मिनट - सौ मील - एक शर्त - अध्याय 5: प्रतुल मोतवाणी

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सुबह के सात बजे। अहमदाबाद के पॉश इलाके में फैला हुआ मोतवाणी हाउस— ऊँची दीवारें। इलेक्ट्रॉनिक गेट। अंदर लंबा ड्राइववे। गेट तोड़ा नहीं गया था। वह खुला था। अंदर दर्जनों गाड़ियाँ खड़ी थीं। आईटी विभाग। सीबीआई। स्थानीय पुलिस। मुख्य दरवाज़े के भीतर अफ़रा-तफ़री थी। दराज़ खुल रहे थे। फाइलें बाहर आ रही थीं। कंप्यूटर टर्मिनल्स से हार्ड-डिस्क निकाली जा रही थीं। सील। टेप। मोहर। दीवारों पर लगी पेंटिंग्स उतारी जा रही थीं। ऊपर बेडरूम में तकिए फाड़े जा रहे थे। गद्दे चीर दिए गए। नोटों के बंडल बाहर गिरे। लॉकर से हीरे-जवाहरात के केस निकले। “पूरी रिपोर्ट तैयार करो,” किसी