बीस मिनट - सौ मील - एक शर्त - अध्याय 4: अतीत की परछाईं

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नील बिस्तर पर बैठा था। सामने आईना रखा था। चेहरे के लाल धब्बे अब गहरे पड़ चुके थे। बायाँ गाल सूज गया था—इतना कि आँख आधी बंद दिखती थी। त्वचा तनी हुई, असमान। पहचान में न आने वाली। एक हाथ में ड्रिप लगी थी। पारदर्शी द्रव धीरे-धीरे नसों में उतर रहा था। वह आईने में खुद को देख रहा था। जैसे किसी और को देख रहा हो। दरवाज़ा खुला। दामिनी भीतर आई। पेट अब साफ़ दिखता था। वह धीरे-धीरे चल रही थी। नील ने तुरंत आईना उठाकर बिस्तर के किनारे फेंक दिया। काँच की हल्की आवाज़ हुई। वह झुककर अस्पताल