बीस मिनट - सौ मील - एक शर्त - अध्याय 3: दामिनी

अपने आलिशान पेंटहाउस के बाहर वे दोनों खड़े थे। ऊँची काँच की दीवारों वाली वह इमारत दूर से ही अलग दिखती थी। नीचे फैला हुआ सजा-सँवरा लॉन—क़रीने से कटी झाड़ियाँ, समतल घास, बीच में पत्थर की महँगी कलाकृतियाँ, जिन पर हल्की धूप चमक रही थी। दोनों ओर पतले पानी के फव्वारे लगातार उठते और गिरते, जैसे इस जगह को कभी शोर की ज़रूरत ही न रही हो। संगमरमर की चौड़ी सीढ़ियाँ उस लॉबी तक जाती थीं जहाँ हमेशा हल्की ख़ुशबू तैरती रहती थी। आज वही जगह चुप थी। नील और दामिनी— साधारण कपड़ों में। ऐसे, जैसे किसी और की ज़िंदगी