रेस से दो हफ्ते बाद नील एक इमारत के सबसे ऊपरी माले पर, छज्जे के किनारे पर खड़ा था। नीचे शहर फैला था—लाइटों का जाल, कारों की रेंगती हुई रेखाएँ, और बीच-बीच में हवा का सन्नाटा। उसकी आँखों में आँसू थे, चेहरा पसीने से भरा। बाल बिखरे हुए। कोट एक ओर फेंका पड़ा था। टाई ढीली। एक पैर किनारे से आगे निकला हुआ—जैसे शरीर अब दिमाग़ से आगे निकल गया हो। उसने नीचे देखा। और फिर— – दो घंटे पहले पार्टी रोशनी और शोर से भरी थी। ग्लास टकरा रहे थे। कैमरे घूम रहे थे। संगीत इतना ऊँचा कि बातचीत