ठुमरियों की छलकती भावपूर्ण रसधार - अतीत से फ़िल्मों तक श्री के .एल . पांडेय [प्रस्तुति- नीलम कुलश्रेष्ठ ] आइए कुछ विशेष फ़िल्मी गीतों को याद कर लिया जाए --के .एल. सहगल के गाये `लग गई चोट करेजवा में ` और `बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाये`, लता मंगेशकर के गाये `जा मैं तोसे नाहीं बोलूँ`,`जा जा रे जा बालमवा `, `कदर जाने ना मोरा बालम बेदर्दी `मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे`, `नदिया किनारे हेराय आई कंगना`,मन्ना डे के `जा रे बेईमान तुझे जान लिया जान लिया `,`आयो कहाँ से घनश्याम`, ‘फुलगेंदवा न मारो’,’ हटो