मौत का दस्तकबनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं की लपटें हवा के साथ ऐसे नाच रही थीं, मानो वे किसी अनहोनी का संकेत दे रही हों।आर्यन अपनी काली रॉयल एनफील्ड को घाट की ढलान पर खड़ा करके नीचे उतरा। उसने अपने जैकेट की चेन ऊपर तक चढ़ाई और एक गहरी सांस ली। उसके चेहरे पर चोट का एक पुराना निशान था, जो उसकी आंखों की गहराई को