मेरे निर्जीव शरीर को श्मशान में अग्नि स्थल पर रख दिया गया और मेरे निर्जीव शरीर के नीचे ऊपर, बराबर में लकड़ियों को ऐसे लगाने लगे, जैसे ईंटों की दीवार बना रहे हो, मैं चाहकर भी अपने चारों तरफ लगी हुई लकड़ियां हटा न सका। मेरी रूह बराबर में खड़ी सारा दृश्य अपनी आँखों से देखती रही।मैंने देखा कि मेरा एकमात्र बेटा आंसू बहा रहा है, बाकी सब आपस की बातें कर रहे हैं, कोई कहीं शादी में जाने की बात कर रहे हैं तो कोई अपने बिजनेस की बातें कर रहे हैं।फिर पंडित जी ने मेरे पुत्र को आवाज