रामू एक छोटे से गांव महासमुंद में रहता था वह शहर में जाके एक नौकरी करता था जिसमें उसकी मासिक आय 15000 थी रामू के वेतन तो कम था पर उसका सपना बहुत बड़े थे उसको हमेशा खुद पर यकीन था कि एक दिन वो जरूर एक बड़ा आदमी बनेगा तो उसने एक दिन सोचा कि इस तरह किसी की नौकरी कर के जिंदगी भर एक नौकर ही बना रहूंगा अब तो कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था पर उसका हौसला मजबूत था गांव का एक छोटे से किसान का बेटा होने के