मंडी में रामदीन कमल चोपड़ा गाड़ी में तरबूज भरे हुए थे। माल देखकर शामलाल दलाल छलांग मारकर गाड़ी से नीचे उतरा। रामदीन से बोला- "देख भाई, मंडी में इतनी मन्दी है कि क्या कहें?"हैरान था रामदीन। 'ट्रक, टेम्पो, रेहड़ी रिक्शा भीड़-भड़क्का मंडी में खड़े होने की तो जगह नहीं है, ये मन्दी है? तो तेज़ी कैसी होती है?'"तरबूज को तो कोई पूछ भी नहीं रहा। खैर.... माल तुम्हारा है तुम बोलो। इनके कितने माँगते