ये सफर तब शुरू होता है जब आप हर रिश्ते से मजबूर हो जाते हैं। आप अपनी भावनाएँ, दुःख, दर्द, तकलीफ़े या रोज़मरा की बात चाह कर भी किसी से नहीं बता सकते...हंसता, खेलता, मुस्कुराता, गाता, नाचता, शोर मचाता, सबको हंसाता चेहरा जब एक दम से शांत हो जाता है.... क्योंकि उसके अंदर बहुत कुछ टूट जाता है....पहले तो ऐसा कुछ नहीं था....कहने वाले लोग....बोलकर चले जाते हैं, पर ऐसा क्यों हुआ ये कोई नहीं जानना चाहता।ये सफर हर किसी की जिंदगी में आता है.... किसी को संघर्ष करने के बाद खुशियों की मंजिल मिल जाती है तो कोई हार