एक डिवोर्स ऐसा भी - 2

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(इस बार रिश्ता सच में बना)नैना और आरव की दूसरी शादी सादगी से हुई।न बड़े फंक्शन, न शोर-शराबा…बस कुछ अपने लोग… और सच्ची मुस्कानें।इस बार नैना ने शादी का लाल जोड़ा पहना तो डर नहीं था।और आरव ने उसका हाथ थामा तो सिर्फ़ वादा नहीं… समझ भी थी। नई शुरुआतशादी के बाद दोनों ने फैसला किया —“इस बार हम घर नहीं… रिश्ता सजाएँगे।”उन्होंने छोटा सा घर चुना।दीवार पर एक फ्रेम लगाया —“हम रोज़ एक-दूसरे को चुनेंगे।”पहले जहाँ खामोशी होती थी…अब बातें होती थीं।पहले जहाँ ego था…अब “सॉरी” जल्दी आ जाता था। पहली परीक्षाएक साल बाद…आरव की नौकरी चली गई।पहले वाला