नैना और आरव की शादी को पाँच साल हो चुके थे।बाहर से देखने पर उनका रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट लगता था — बड़ा घर, अच्छी नौकरी, मुस्कुराते चेहरे…लेकिन उस घर की दीवारें जानती थीं कि वहाँ प्यार कम और खामोशी ज़्यादा रहती थी।नैना बहुत भावुक थी।वह छोटी-छोटी बातों में खुशियाँ ढूँढती थी — सुबह की चाय साथ पीना, रात को बातें करना, अचानक कहीं घूमने जाना…लेकिन आरव के लिए जिंदगी बस काम, मीटिंग और जिम्मेदारियों तक सीमित थी।धीरे-धीरे नैना ने बोलना कम कर दिया।और आरव ने नोटिस करना।एक दिन नैना ने शांत आवाज़ में कहा —“आरव… क्या हम खुश हैं?”आरव ने