श्रीहरि का नरसिंह अवतारपौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, जब संपूर्ण सृष्टि हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु जैसे असुरों के आंतक से त्रस्त थी। चारों ओर आसुरी शक्तियों की प्रबलता थी। धर्म, कर्म और वेद, यज्ञ आदि की प्रतिष्ठा लगभग निष्प्राण हो चुकी थी। ऐसे विपरीत और गहन धार्मिक संकटकाल में भी प्रह्लाद जैसे भक्त की पावन भक्ति ने श्रीहरि को नृसिंह अवतार धारण करने हेतु प्रेरित किया। भक्त प्रह्लाद की कथा का आरंभ