श्रापित एक प्रेम कहानी - 53

  • 1.1k
  • 408

एकांश गुणा और चतूर से कहता है-- थैंक्स यार तुम दौनो ने मेरी बहुत हेल्प की । अगर आज ये दवाईयां नही आती तो बहोत प्रब्लाम हो जाती । चतुर एकांश से कहता है--> दैख यार दोस्ती में नो थैंक्स । वैसे भी हमारे पास ही नही हा कुछ करने को इसिलिए इसे कर लिया। तभी गुणा हिचकिचाते हुए कहता है--> यार एकांश हम दौनो ये सौच रहे थे के जब हमारे पास काम करने के लिए कुछ भी नही है। तो ..... !! तो क्यों ना तुम हमे इसी हॉस्पिटल मे कुछ काम दे दो। गुणा और चतुर की बात सुनकर एकांश