मातंक कहता है--> तुम चिंता ना करो मित्र कुम्भनी हमारी भी पुत्री है और उसे बचाने के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं। अब हमे कहां जाना होगा मित्र ? मांतक की बात सुनकर कुंम्भन कहता है--यहां इस जंगल के बाहर तीन गांव है इन्ही तीन गांव मे से किसी एक गांव मे मणी छुपी हूई है । तुम्हे अपना भेष बदल कर उसका पता लगाना होगा। मांतक कहता है --> ठीक है मित्र । अब आञा दो । तभी मांतक को रौकते हूए कुंम्भन कहता है --> ठहरो मित्र । एक बात और जिसके पास भी वह मणी होगा वह मानव श्रापित होगा। कुम्भन