> भाया वो...वोह...। दुसरा आदमी कहता है--> अरे भाया पहले थौड़ी सांस ले लो फिर कहना। वो आदमी कुछ दैर सांस लेता है और फिर कहता है --> भाया वो रक्षा कवच अब नही रहा किसीने उसे वहां से हटा दिया है। इसिलिए कुंम्भन जंगल से बाहर आया। इतना सुनने के बाद सभी उस आदमी पर गुस्सा होकर कहता है --> ये लो इसे अब पता चला, अरे मुरख कलस वहां से हटा था तभी तो कुंम्भन बाहर आया था , और इंद्रजीत बाबु ने वहां पर रक्षा कलश रख दिया है , अब कुंम्भन फिर से सुंदरवन मे कैद हो गया है समझे।इधर