बिल्ली जो इंसान बनती थी - 6

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सुबह की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। शानवी की आँख खुली…लेकिन आज…उसका मन अजीब सा भारी था।जैसे कोई बात अधूरी रह गई हो। वो कुछ पल छत को देखती रही…फिर करवट बदली। और उसकी नजर…अपने पास सो रहे उस सफेद बिल्ले पर पड़ी। कार्तिकेय। वो अभी भी चैन से सो रहा था। शानवी उसे देखने लगी। बहुत ध्यान से।उसका चेहरा…उसकी आँखें…उसकी नाक…सब कुछ वही था…लेकिन फिर भी… उसके दिल में एक आवाज़ आई —कल रात…जब मैंने छुआ था…ये… ऐसा नहीं लग रहा था…।उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। वो याद करने की कोशिश करने लगी…नींद…आधी होश…और… किसी सख्त से