कुछ महीने पहले काशी जाना हुआ |बस में मेरी खिड़की वाली सीट थी | मैं बैठ चुकी थी कि एक महिला आकर बगल में बैठीं, उनके साथ उनका पति और लगभग चार-पाँच साल का एक बच्चा |पतिदेव सामने की सीट पर बच्चे के साथ बैठ गए |बस चली… कुछ ही किलोमीटर हुए होंगे कि उस महिला ने कुछ धीमे से कहा.. शायद कोई बात पूछी, या याद दिलाई होगी |और फिर जो हुआ, वो आम होते हुए भी असहनीय था |उस पुरुष ने अचानक अपनी आवाज़ ऊँची कर दी..नहीं, इतनी ऊँची कि बस के हर मुसाफ़िर का ध्यान उधर गया