स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' - राणा मेंशनसमय: सुबह १०:०० बजेआरंभी को जब होश आया, तो उसे अपना अस्तित्व किसी 'क्रैश' हुए सर्वर की तरह बिखरा हुआ महसूस हुआ। जैसे ही उसने आँखें खोलीं, सुबह ५:३० बजे का वह रूह कंपा देने वाला मंजर—वह खून से सना खंजर, वह दर्दनाक चीख और आर्यवर्धन का वह क्रूर चेहरा—उसके दिमाग में '4K रेजोल्यूशन' में फ्लैश होने लगा।खिड़की से उस 'डेथ-लीप' (छलांग) की वजह से उसकी पीठ और बाहों पर नीले निशान उभर आए थे, लेकिन वह दर्द उस 'मेंटल ट्रॉमा' के सामने कुछ भी नहीं था जिसे उसने अभी अनुभव किया था। तभी,