️ महाशिवरात्रि व्रत कथा काव्य रूपफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात आई,अंधकार में चंद्रमा की रौशनी छाई।वन में गूँज उठे कानों में शांति के स्वर,शिवभक्तों के हृदय में जागा था अमर प्रेम का असर। कथा प्रारंभएक नगर में शिकारी सुदर्शन रहता,हिंसा और शिकार में ही उसका जीवन बसता।धन-धान्य से उसका घर भरा नहीं था,बल्कि पाप और अपराध उसका दिनभर का व्यायाम था।एक दिन वन में वह चला, शिकार की खोज में,परंतु न मिला शिकार, न सुख, न आज की रोज़मर्रा में।भूखा, थका और प्यासा, वह बेल वृक्ष पर चढ़ा,जहाँ नीचे शिवलिंग खड़ा था, जैसे स्वयं शिव वहीं बसा।रात हुई, अंधेरा छाया,सुदर्शन