इस घर में प्यार मना है - 14

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वहीं हवेली जो हमेशा कब्र जैसी खामोश रहती थी—आज चीख़ रही थी। नौकरों की लाइन लगी है ।आँगन में सभी नौकर-नौकरानियाँ सिर झुकाए खड़े थे।सास (गुस्से में) बोली - किसकी वजह से वो चारों भागे?!बोलो! किसने मदद की?!कोई जवाब नहीं सिर्फ डर।सास बोली - तुम!एक बूढ़े माली की तरफ़ इशारा करते हुए बोली - तुम्हारी वजह से सब हुआ!माली (काँपते हुए) बोला - मालकिन…मैंने तो…कुछ भी…माली के थप्पड़ पड़ा — छन्न!सास बोली - चुप!सास बोली - आज से तुम…और तुम…और तुम…तीन लोगों की तरफ़ उँगली करके बोली - इस हवेली में नौकरी नहीं करोगे!एक नौकरानी फूट-फूट कर रो पड़ी।नौकरानी बोली - मालकिन…हमारे छोटे छोटे बच्चे हैं…सास बोली - तो