बिल्ली जो इंसान बनती थी - 5

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सुबह से ही शानवी का मन भारी था। रात वाले सपने ने उसे अंदर तक हिला दिया था। फिर भी वो खुद को संभालकर ऑफिस चली गई। पूरा दिन…वो बस काम में लगी रही।खुद को बिज़ी रखने की कोशिश करती रही।लेकिन किस्मत…आज कुछ और ही तय करके बैठी थी।दोपहर के वक्त…अचानक उसका बॉस उसके केबिन में आ गया।और उसकी नजर…बैग के पास बैठे उस सफेद बिल्ले पर पड़ गई।Boss बोला - ये क्या है? ऑफिस में जानवर?उसकी आवाज़ सख्त थी। शानवी घबरा गई।शानवी बोली - सॉरी सर… वो ये बहुत शांत है… किसी को परेशान नहीं करेगा…।लेकिन बॉस गुस्से में थे।वो बोले