जीवन का प्रत्यक्ष विज्ञान-दर्शन - वेदांत 2.0

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 “जीवन का प्रत्यक्ष विज्ञान-दर्शन” — वेदांत 2.0   मनुष्य सदियों से खोज में है।   उसने धर्म बनाए, शास्त्र लिखे, गुरुओं का अनुसरण किया, साधनाएँ रचीं, और अनगिनत मार्गों पर चला — क्योंकि उसके भीतर एक मूल प्रश्न हमेशा जीवित रहा: जीवन क्या है, और पूर्णता कहाँ है? फिर भी, जितना अधिक मनुष्य ने खोजा, उतना ही वह जटिलता में उलझता गया। जो सरल था, वह कठिन बना दिया गया; जो प्रत्यक्ष था, उसे विश्वासों और विधियों के पर्दों में ढक दिया गया। परिणाम यह हुआ कि जीवन जीने के स्थान पर मनुष्य जीवन को सुधारने, बदलने या जीतने की