“ऋगुवेद सूक्ति--(11) की व्याख्या--एको विश्वस्य भुवनस्य राजा” — ऋग्वेद -- ६/३६/४ भावार्थ --सब लोकों का स्वामी वह एक ही है। पूर्ण ऋचा इस प्रकार है--एको विश्वस्य भुवनस्य राजास योधया च क्षयया च जनान्।एकः — एक हीविश्वस्य भुवनस्य — समस्त जगत्/सृष्टि काराजा — स्वामी, नियन्तासः — वही (ईश्वर)योधया — संरक्षण/संघर्ष में सहायता सेक्षयया — पालन-पोषण सेजनान् — प्रजाओं कोभावार्थ--वह एक परमेश्वर सम्पूर्ण विश्व का राजा (नियन्ता) है। वही अपनी शक्ति से प्राणियों की रक्षा करता है, उनका पालन करता है और व्यवस्था को संचालित करता है।उपनिषद प्रमाण--श्वेताश्वतर उपनिषद (६/११)एको देवः सर्वभूतेषु गूढःभावार्ध-- एक ही देव सब प्राणियों में अन्तर्निहित है।कठोपनिषद (२/२/१३)नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम्एको बहूनां यो