सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रहे थे।अख़बार के पहले पन्ने पर बड़ी हेडलाइन छपी थी —कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए नया नियम लागू।मिश्रा जी ने चाय की चुस्की ली और खबर को दोबारा पढ़ा। चेहरे पर हल्की चिंता की लकीर उभर आई।उन्होंने सोचा —“समाज इतनी जल्दी बदल जाएगा क्या? लोग मान लेंगे क्या?”अख़बार में नीचे लिखा था —कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ