रिश्तों का दर्द

रिश्तों का दर्द लेखक: विजय शर्मा एरी  ---प्रस्तावनारिश्ते जीवन की सबसे बड़ी पूँजी होते हैं। ये हमें सहारा देते हैं, हमें पहचान देते हैं और हमें जीने का अर्थ समझाते हैं। लेकिन जब रिश्तों में दरारें पड़ती हैं, जब अहंकार और अपेक्षाएँ बीच में आ जाती हैं, तब वही रिश्ते कशमकश का कारण बन जाते हैं। यह कहानी इसी द्वंद्व की है—जहाँ प्रेम और विश्वास के बीच अहंकार खड़ा हो जाता है, और जहाँ समझौते की जगह संवाद की कमी रिश्तों को उलझा देती है।  ---कहानीअमृता और विवेक की शादी को दस साल हो चुके थे। दोनों ही पढ़े-लिखे, आधुनिक सोच वाले लोग