---हिन्दी कहानी: तुम बिन(लगभग 1500 शब्दों में) ---प्रस्तावनाकभी-कभी ज़िन्दगी हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है जहाँ हर सांस भारी लगती है। किसी अपने का जाना केवल उसकी अनुपस्थिति नहीं होता, बल्कि हमारे भीतर की दुनिया का टूट जाना होता है। यह कहानी राघव और सिया की है—प्रेम, विरह और आत्म-खोज की। ---पहला अध्याय: मुलाक़ातराघव और सिया की पहली मुलाक़ात कॉलेज के पुस्तकालय में हुई थी। राघव किताबों में डूबा रहता था, जबकि सिया को कविताएँ और कहानियाँ पढ़ने का शौक था। एक दिन सिया ने मुस्कुराते हुए कहा— “तुम हमेशा इतने गंभीर क्यों रहते हो? ज़िन्दगी सिर्फ़ किताबों में नहीं, हंसी में