बहुत अच्छा, ---बचपन का दोस्त लेखक: विजय शर्मा एरी ---गाँव की गलियाँ और पहली दोस्तीगाँव की संकरी गलियाँ, मिट्टी की खुशबू और तालाब किनारे की ठंडी हवा—यही हमारी दुनिया थी। मैं नया-नया दाख़िल हुआ था स्कूल में। डर और संकोच से भरा हुआ। तभी राजू आया और बोला— राजू: “अरे, तू नया आया है? चल, मैं तुझे सब दिखाता हूँ।” उसकी आँखों में अपनापन था। उसी दिन से हमारी दोस्ती की डोर बंध गई। ---खेलों का संसारहमारे खेलों की दुनिया रंग-बिरंगी थी। - कंचे: राजू की उँगलियों में जादू था। हर बार जीतता। - गिल्ली-डंडा: मैं गिल्ली मारता, वह दौड़कर पकड़ लाता। - पतंगबाज़ी: हम दोनों छत पर चढ़कर