---वास्तविक सौंदर्यलेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनासौंदर्य की परिभाषा सदियों से विवादित रही है। कोई इसे रूप-रंग में देखता है, कोई वस्त्रों और श्रृंगार में, तो कोई इसे आत्मा की गहराइयों में खोजता है। मनुष्य का मन अक्सर बाहरी आकर्षण से प्रभावित होता है, परंतु जीवन की कठिनाइयाँ और अनुभव हमें यह सिखाते हैं कि वास्तविक सौंदर्य वह है जो भीतर से झलकता है। यह कहानी इसी सत्य को उजागर करती है। ---1. गाँव का जीवनपंजाब के एक छोटे से गाँव की सुबह। खेतों में सरसों के फूलों की पीली चादर बिछी थी। हवा में मिट्टी की खुशबू और पक्षियों का कलरव। गाँव