अमरूद का पेड़

‎घनश्याम त्रिपाठी का जीवन हर सुख से पूर्ण था। आज्ञाकारी बच्चे और पत्नी भी मृदुभाषिणी थी। धन-सम्पदा में भी कोई कमी न थी। 50 बीघे खेत, बड़ा घर व बाज़ार में कई दुकानें चलती थीं। लेकिन इतना सब कुछ होते हुए भी हृदय अभी भी बड़ा न था।‎घर दो मंजिला था। शहरी इलाका होने के कारण आंगन के नाम केवल 4-5 मीटर एक गलियारा था, जिस पर भी फर्श बना दी गई थी। उसी में शौक के लिए कुछ पेड़-पौधे लगा रखे थे। इस बगीचे का मुख्य आकर्षण एक अमरूद का पेड़ था। पेड़ लम्बा था और एकदम सीधे जाकर