कांन्ट्रैक्ट वाइफ

भाग 1दुबई की शामें झूठी होती हैं।खूबसूरत, चमकदार… और भीतर से बेरहम।सूरज समुद्र में डूब रहा था। आसमान गुलाबी और बैंगनी रंगों में बंट चुका था। सामने शीशे की तरह चमकता शहर—और उसके बीच, आसमान को चीरता हुआ खड़ा बुर्ज खलीफा।दूर से देखने पर लगता है जैसे यह शहर सपनों से बना हो…पर जो इसके अंदर रहते हैं, वे जानते हैं—यहाँ सपने नहीं, सौदे होते हैं।और आज, एक सौदा होने वाला था।1आयरा खान ने अपनी उंगलियाँ आपस में कस लीं।एयर-कंडीशंड ऑफिस के बावजूद उसकी हथेलियाँ ठंडी नहीं हो रही थीं।सामने कांच की दीवार के उस पार दुबई फैली हुई थी—जैसे