भाग 1 — अजनबी जो सब जानता थाशहर का नाम रूद्रनगर था।एक ऐसा शहर जहाँ रातें ज़्यादा सच बोलती थीं और दिन सिर्फ़ झूठ ढोते थे।बारिश हो रही थी।तेज़ नहीं—बस इतनी कि सड़कें चमकने लगें और हर परछाईं दोहरी दिखे।ज़ोया रहमान बस स्टॉप पर खड़ी थी।कंधे पर पुराना सा बैग, आँखों में थकान और चेहरे पर वो ख़ामोशी… जो सिर्फ़ मजबूरी से पैदा होती है।ज़ोया 22 साल की थी।माँ बचपन में मर चुकी थी।बाप शराब में डूबा हुआ।और ज़िंदगी—उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा मारती थी।वो एक छोटे से न्यूज़पेपर में इंटर्न थी।काम का नाम था “रिसर्च”, लेकिन असल में वो सस्ते कॉफ़ी