शादी की रस्में अग्नि और मंत्रोच्चार के शोर में किसी 'बफरिंग' होती मेमोरी की तरह धुंधली लग रही थीं। आरंभी को महसूस हुआ कि उसका शरीर किसी 'ऑटो-पायलट' मोड पर चलने वाली कठपुतली की तरह रस्में पूरी कर रहा था, लेकिन उसका मन एक 'एनक्रिप्टेड फायरवॉल' के पीछे कैद होकर चीख रहा था।जब भी अग्नि में आहुति देने के लिए उनके हाथ एक-दूसरे को छूते, आरंभी को किसी 'हाई-वोल्टेज' शॉर्ट सर्किट जैसा झटका लगता। आर्यवर्धन अग्निहोत्री ने अपनी नजरें उससे एक सेकंड के लिए भी नहीं हटाई थीं। वह उसे किसी 'क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन' की तीव्रता से देख रहा था, मानो