अगला एक हफ्ता किसी धुंधले और खौफनाक सपने जैसा था—रेशम, लेस और बंदूकधारी गार्ड्स के बीच बीता एक ऐसा हफ्ता, जिसने आरंभी शास्त्री की दुनिया की नींव हिला दी थी। शास्त्री निवास विला अब वह सुकून भरा घर नहीं रहा था; वह एक 'स्टेजिंग ग्राउंड' बन चुका था जहाँ किसी कीमती सौदे की प्रदर्शनी लगनी थी। विला की सफेद दीवारें और सुनहरे झूमर अब भी अपनी भव्यता में चमक रहे थे, लेकिन हर दरवाजे पर डार्क सूट पहने खड़े आदमियों ने उस चमक को खौफ के साये में बदल दिया था। उनकी आँखें काले चश्मों के पीछे पत्थर की तरह