त्रिशा अपने ही अंदर गूंज रही और आपस में एक दूसरे से लड़ रही उन दोनों आवाजों को सुन सुन कर और भी असमंजस में पड़ती जा रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह क्या फैसला करे। वो राजन को जो उसने उसके साथ जानवरों सा सलूक किया उसके लिए माफ कर दे या नहीं????? त्रिशा काफी देर तक अपनी उलझन में उलझी रही पर उसे कुछ समझ नहीं आया। और सबसे बड़ी बात की राजन वहीं उसके पास बैठा ऐसे दोषी की तरह देख रहा है जिसे भरी अदालत अपनी सजा की सुनवाई का इंतजार हो।वो एकटक