अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।कमरा बिल्कुल शांत है।Shreya धीरे-धीरे आँखें खोलती है… सिर भारी है पर अब दर्द उतना नहीं।वो उठकर बैठती है और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँखें भर आती हैं—Karan और Kabir दोनों बैठे-बैठे ही सो गए थे।Kabir उसका हाथ दोनों हाथों से पकड़े बैठे-बैठे सोया था।Karan उसका सर सहलाते-सहलाते ही नींद में झुक गया था।दोनों के चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी।Shreya को देखकर समझ आ जाता है कि दोनों भाई पूरी रात उसकी देखभाल करते रहे।उसके गले में एक सिसकी अटक जाती है।Shreya (धीरे से फुसफुसाते हुए) बोली - ये