श्रापित एक प्रेम कहानी - 47

एकांश की बात सुनकर सत्यजीत कहता है---> नही बैटा अब वो ऐसा नही कर पाएगी क्योकीं भैया और मैं साधु बाबा से मिलकर आ रहे हैं और उन्होंने हमे एक रक्षा कलस दिया है। जिसे हमने उसी पैड़ पर बांधकर आ रहे हैं। अब वो कुंम्भन फिर से उसी सुंदरवन में कैद हो गया है। पर.......। इतना बोलकर सत्यजीत चूप हो जाता है। एकांश पूछता है---> पर क्या चाचा , बोलिये ना । सत्यजीत कहता है---> बेटा मुझे चिंता इस बात की है के जिसने शिला को गायब किया अगर उसने इसे भी गायब कर दिया तो और जब उसने रक्षा शिला को