खामोशी का इकरार - CH-1 - वो आखिरी रात

मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो सच है। हर एक शब्द। हर एक पल। क्योंकि कुछ सच इतने भयानक होते हैं कि उन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। मुंबई की उस बरसाती रात को जब मैंने पहली बार मायरा को देखा था, मुझे नहीं पता था कि मेरी ज़िंदगी एक ऐसे भंवर में फंसने वाली है जिससे मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊँगा। वो एक आर्ट गैलरी में खड़ी थी, काली साड़ी में, एक पेंटिंग के सामने इतनी तन्मयता से देख रही थी मानो वो